उस देवी को हम कहते हैं माँ !
कदमों में है जिनके स्वर्ग बसा
बाहों में जिनके प्यार भरा
हृदय में जिनके प्रेम चला
आँखों में जिनके स्नेह रखा
उस देवी को हम कहते हैं माँ !
प्रथम गुरु वो बन कर
सब कुछ हैं वो हमें पढ़ाती,
ममत्व वो हम पर बरसाती
अपनत्व वो हम पर दिखलाती
चलना वो हमें सिखलाती
संस्कार वो हमें समझाती
भले-बुरे कि सीख बताती
खुद गीले में सो कर भी
हमें सूखे में सुलाती ,
खुद भूखे रह कर भी
हमें खाना खिलाती ,
लोरी गा-गाकर वो हमें नींद दिलाती
हमेशा हमें पिताजी की डांट से बचाती
हमारी ख़ुशी में फूली नहीं समाती
हमारे दु:ख में व्याकुल हो जाती
और हमारे घावों पर स्नेह लेप लगाती
पूर्णिमा में हमें चाँद दिखलाती
अमावस्या से वो हमें बचाती
इस संसार की निर्ममता से हमें सुरक्षित रखती
इस जग के सौंदर्य से हमे परिचित कराती
उस देवी को हम कहते हैं माँ !
उनके समकक्ष है ना कोई खड़ा
उनका जीवन है अपनों के लिए बना
उस देवी को हम कहते हैं माँ
उनके लिए न्यौछावर है हमारी जाँ !!

mast likha hai yarr... dil khush huaa..maa ki yaaad aayi.. :)
जवाब देंहटाएंDhanyvad yar..........:)
जवाब देंहटाएंvaise maine bhi yeh jab likha tha jab mujhe maa ki bahut yad aa rhi thi ......
this one is, I must say "excellent" :"salute"
जवाब देंहटाएंthanx yar ............alti after all tumne humari kavita ki prashansha kar hiu di.........
जवाब देंहटाएंbahut achcha lage rho..... :P
जवाब देंहटाएंi m proud of u....
dil khush kar diya...
ballu.... sahi hai be pura jaan dal diye ho :)
जवाब देंहटाएंbhai bahut hi bahut accha khoob tareeki karo. may you go place...
जवाब देंहटाएंbhai aise hi lage raho..... hats of to you.