शनिवार, 18 सितंबर 2010

"तलाश "


उन की तलाश में हम यहाँ -वहाँ भटके ;
पर हमको क्या पता था वो कहीं नहीं थे !
हमें  क्या पता था ,हमें  तलाशना है उनको ;
क्योंकि वो हमें  तलाशते हुए कहीं चले गए थे !!
हमने दूर जाके देखा उनको ,
उन्होंने भी देखा हमें  अपनी कशिश नज़रों से ;
पर हमें  क्या पता था  कि  हम स्वप्न में थे !
लेकिन हमें  तो तलाशना था उनको ,
तो हम उन्हें तलाशते ही चले गए !!
इस तलाश में हम इतनी दूर आ गए ,
कि हम उनके करीब जाकर भी करीब नहीं थे ;
क्योकि वो कही थे हम कही थे !!
अब तो इस तलाश में ,
हमारे पदचिह्न भी हमें  तलाश रहे हैं ;
क्योंकि हम खो गए हैं कहीं इस "तलाश" में !
पता नहीं कब और कहाँ ख़त्म होगी यह हमारी "तलाश" उनकी "तलाश" में!!!

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