रविवार, 19 सितंबर 2010

" वह जो मुस्कुरा दिया "

सब से छुपा कर दर्द , वो जो मुस्कुरा दिया 
उस कि हंसी ने आज तो हमको   भी रुला दिया ;


लहजे से उठ रहा  था , हर  इक  दर्द  का  धुंआ 
चेहरा  बता  रहा  था  की  उसने कुछ  गँवा   दिया ; 



जाने क्या उसको, लोगों से थी शिकायतें 
तनहाइयों के देश में  खुद को बसा दिया ;


खुद भी वो हम से बिछड़ कर, अधूरा सा हो गया 
हम को भी इतने लोगों में तन्हा सा बना दिया ;


सब से छुपा कर दर्द , वह जो मुस्कुरा दिया 
उस कि हंसी ने आज तो हमको  भी रुला दिया !

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