रविवार की दोपहर को मैं और मेरे दो दोस्तों ने सलुआ(मोमो स्थल) जाने की योजना बनाई| तो शाम छः बजे जाना तय हुआ |जैसे-तैसे मैंने एक दोस्त से मोटरसाईकिल का इन्तेजाम किया |हम तीनों बेपरवाह होकर मोटरसाइकिल पे सवार अपनी यात्रा को निकल पड़े (चूँकि आईआईटी परिसर में मोटरसाईकिल चलाना अवैध है इसीलिए बेपरवाह शब्द का प्रयोग किया है :P ) |एक तो वह मोटरसाइकिल पहले ही अपनी उम्र प्राप्त करने के करीब पहुँच चुकी थी और ऊपर से उसके हाथ-पैर भी ढंग से कार्य नहीं कर रहे थे |इन सभी परिस्थितियों को मद्देनज़र रखते हुए तीनों की जान की जिम्मेदारी का पूरा बोझ चालक के कन्धों पर आ पड़ा था |और ऐसी विकट परिस्थिति में चालक की जिम्मेदारी दी गई थी सबसे अनुभवी(हम तीनों में )/अनुभवहीन(मात्र एक-दो दफ़ा) जो बदकिस्मती से मैं स्वयं ही था |
हम आईआईटी के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए प्रेम-बाज़ार गेट से बाहर निकले |यहाँ से हमारा वास्तविक सफ़र शुरू हुआ |नितीश उर्फ़ अल्टी ने मोमो-खान के लिए रुपया उत्सर्जन यन्त्र से रूपये निकाले |उसके बाद जैसे ही मैंने मोटरसाइकिल को चालू करके आगे की ओर प्रस्थान किया ,तो एक खौफनाक मंज़र हमारा इंतज़ार कर रहा था | सामने से एक विशालकाय बस आते हुए दिखी और हमारी मोटरसाइकिल उसको टक्कर मारने ही वाली थी (क्यूंकि बूढ़ी होने के कारण उसके हाथ-पैर पहले ही जवाब दे चुके थे एवं उसके दांत भी नहीं चमक रहे थे ) कि मैंने उसे एक स्थिर मारुति और उस दौड़ती बस के बीच में से निकालते हुए सड़क मार्ग से नीचे उतारा |उस समय हमारी सांसे मोटरसाइकिल के पैरों में अटकी हुई थीं |लेकिन आनंदजी अपनी अंतिम आनंदमयी यात्रा(उस समय की सोच के अनुसार) में कुछ ज्यादा ही आनंदित हो गये और मोटरसाइकिल पर ही गुदगुदी करने लगे |इस हरकत को देखकर मेरा पारा मोटरसाइकिल की गति से भी तेज बढ़ने लगा |जैसे-तैसे हमारी जान बची और हमने सोचा "जान बची तो लाखों पाए " ...
फिर आसमान की और निगाह दौड़ाई तो तारों को देख कर हमें अपने जीवित रहने का एहसास हुआ |तदुपरांत गगन की गोद में प्रजव्वलित तारों की रोशनी के सहारे से हमारी सवारी उस अंधकारमय मोमो-पथ को पार करती हुई अपने अंतिम पड़ाव स्थल सलुआ पहुंची |वहां हमने मोमो का रसास्वादन किया |वहां के सौंदर्य दृश्य को देखकर हमें नयन-सुख प्राप्त हुआ |इस तरह हम अपनी रोमांचकारी-खौफ़नाक मोमो-पथ यात्रा को समाप्त कर अपनी बूढ़ी मोटरसाइकिल पर सवार छात्रावास की ओर लौट आये...
an adventurous journey for sure
जवाब देंहटाएंhmm mujhe bhi kuchh aisa hi laga tha...
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